Wednesday, June 19, 2013

प्रकृति का प्रकोप या चालाक मनुष्य

लगभग चालीस से पचास के दशक में केदारनाथ जैंसा था आज वैसा ही हो गया ..... !

जो हुआ वो बहुत बुरा हुआ, ये नही होना चाहिए था...लेकिन दोस्तो ये भी याद रहे हमें आज घटी इस घटना से सबक लेना भी जरुरी है। हिमालयी क्षेत्रों में अपने थोड़े से स्वार्थ के लिये और व्यक्तिगत विकास के लिये प्राकृतिक सँसाधनोँ का जिस निर्दयतापूर्ण ढँग से लगातार दोहन किया जा रहा है.. कही ना कही यह सब उसी का परिणाम है ।

देखिये जरा गौर से चालीस से पचास के दशक के केदारनाथ धाम की यह तस्वीर तब यहाँ सिर्फ गिनती की कुछ घास फूस की झोपड़ियां हुआ करती थी। क्या आम और क्या खाश सबके आशियाने यही थे । लेकिन देश स्वतंत्र हुवा महत्वकांक्षाएं भी बढ़ी इस सब के बीच आधुनिकता की दौड़ भी चलने लगी जिसके परिणाम स्वरूप चन्द सालों में ही आस्था के इस धाम में विकास रूपी कंक्रीट के जंगल ने एक आधुनिक नगर की शक्ल ले ली थी.

 लेकिन अब, .... आज की इस तस्वीर को भी देखिये और चालीस के दशक की ब्लैक एण्ड व्हाइट तस्वीर के साथ मिलान कीजिए उसी हालत में पाएंगे आप ओघड बाबा की समाधिष्ठ धाम को ।

क्या कहोगे इसे..... प्रकृति का प्रकोप या चालाक मनुष्य को प्रकृति का तमाचा ..... ?

इंसान प्रकृति से है प्रकृति इंसानो से नही, इस बात का हमे ध्यान रखना होगा।  प्रकृति से टकराव के परिणामो को समझना चाहिए। प्रकृति के सामने इंसान कुछ भी नही है।



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Monday, June 17, 2013

कुदरत का कहर



बारिश का कहर
उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से भारी तबाही हुई है। चारो और तबाही का आलम है बारिश ने यंहा पिछले 88 सालो के रिकार्ड ध्वस्त कर दिए है. विभिन्न स्थानों पर बारिश , भू स्खलन , और बादल फटने से अब तक 25 लोगो की मोत हो चुकी है जबकि लापता होने वालो की संख्या 200 के करीब पहुँच गयी है 

राज्य के चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ नपदों का सम्पर्क राजधानी देहरादून से पूरी तरह टूट गया है   उत्तराखंड सरकार ने पुष्टि की है और करीब 40000 यात्री राज्य में चार धाम यात्रा मार्गो पर फसे है लेकिन उनकी मदद करने के राज्य सरकार के तमाम प्रयास विफल हो गए है 

धारचूला, पिथौरागढ़ में काली नदी ने रुख बदला, जान-माल की क्षति, नेपाल की ओर भारी नुकसान की खबर। रामगंगा भी थमने का नाम नही ले रही है, पानी का स्तर सामान्य से काफी ऊपर है । उत्तरकाशी तबाही की कगार पर है, अलकनंदा अपने उग्र रूप में श्रीनगर से बह रही है! गंगा हरिद्वार को मिटाने पर तुली है! कर्णप्रयाग मैं भी बारिश की वजह से काफी तबाही हुयी है ........पानी का स्तर सामान्य से काफी ऊपर है

सम्पूर्ण उत्तराखंड इस वक्त तहश नहश हो रहा है!
 बारीश में फंसे लोगों की मदद के लिए राज्य सरकार ने हेल्पलाईन नंबर जारी किया है। कंट्रोल रूम के नंबर उत्तरकाशी - 01374-226126-22 6461
 टिहरी - 01376- 233433
चमोली - 01372 -251437, 01372 - 1077(टोल फ्री)
रुद्रप्रयाग - हेल्पलाइन : आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम 1077 और 01364-233727

सड़क दुर्घटना 

वही दूसरी ओर कुमाऊं मण्डल में अल्मोड़ा जिले के सेराघाट में दिल्ली से लौट रही रोडवेज की दो बसें धौलछीना के पास खाई में गिर गई। एक बस से चार शव और 20 घायलों को निकाला गया है। जगह-जगह मार्ग अवरुद्ध होने से बचाव दल मौके पर नहीं पहुंच सका था।

सोमवार सुबह दिल्ली से धारचूला और गंगोलीहाट जा रही रोडवेज की दो बसें अल्मोड़ा जिले के सेराघाट क्षेत्र में कसान बैंड के पास मलबा गिर जाने से खाई में गिर गई।

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