Saturday, June 17, 2017

याद छ महाराज "भरांण"

"भरांण" पहाड़ गाँव के पुराने मकानों की अतिआवश्यक सामाग्री ये लकड़ी के भारी भरकम पिलर, जो घर को बनाने में जरूरी होने वाला ठहरा । पहले तो सारे घर मिट्टी लकड़ी पत्थर के ही बनते थे तो गाँव घरों में जब भी किसी का मकान बनता था या सुधारा(रिपेयर) जाता था तो उसके लिये लकड़ी के भरांण की भी जरूरत पड़ती थी, यह काफी भारी और बड़ा होने वाला ठहरा तो जंगल से इसे लाने के लिये गाँव के सारे युवाओं को बोला जाने वाला ठहरा तो सब लोग मिल जुलकर इस भारी भरकम "भरांण" को  इस तरह जग(ढो) कर लाते थे।

    यह एक तरह से मिसाल ठहरी हमारे पहाड़ गाँव के लोगों की एकता का। अब तो लोहे सीमेंट वाले मकान बनते हैं तो ये सब चीजें ना के बराबर दिखती हैं। आज जो भी इस फोटो को देख रहा होगा उनमें से भी कई मित्रों ने गाँव में यह काम जरूर किया होगा। है ना ????

अब जिनकी पैदाइश शहर में ही हुई उनको तो क्या पता ठहरा ये सब ! लेकिन आने वाली पीढ़ी को इस बात की जानकारी हो कि एक समय ऐसा भी था उसके लिये हमें किसी न किसी माध्यम से अपनी इन यादों को सँजोये रखना तो होगा ही।

 इसीलिए इस वैब के माध्यम से इसे सँजोने का एक छोटा सा प्रयास मैं भी कर रहा हूँ। आशा है आप सब लोगों को पसंद आएगा।

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