Saturday, March 23, 2013

कुछ ख़ास ही है अपने पहाड़ में कुमाऊँ की खड़ी होली

दोस्तो वैसे तो बसंत पंचमी से ही हमारे उत्तरांचल मे होली की धूम मचने लगती है। बैठकी होली और खड़ी होली ये दो रूप हैं पहाड़ की होली के। बसंत ऋतु के आगमन के बाद बैठकी होली सुरू हो जाती है और फागुन मास की एकादशी से कुमाऊँ मण्डल में खड़ी होली का गायन शुरू हो जाता है।
Holi in Village Temple Tuntaकुमांऊ मंडल में हर बार फाल्गुन माह की एकादशी से खड़ी होली की शुरूवात होती है इस दिन सर्वप्रथम गाँव के मंदिर में होली का गायन होता है कुछ जगहों पर चीड़(एक प्रकार का झण्डा जिस पर कपड़े के छोटे छोटे टुकड़े बंधे जाते हैं।) बांधने का भी रिवाज है।
पहले दिन होली के मैदान (एक स्थान या एक घर बिशेष होता है जहां पर से हमेशा होली का प्रारम्भ होता है और अंतिम दिन वहीं पर होलिका दहन किया जाता है और प्रसाद बांटा जाता है। इसे लोकभाषा में "होली खाव" कहा जाता है) से कुछ होल्यार (लोग) ढ़ोल-बाजे के साथ मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं होली गाते हुये और बाँकी लोग जुडते चले जाते हैं उनके साथ। सभी लोग मंदिर में पहुँचते हैं, और मंदिर में पुजारी दिया जलता है, धूनी भी जलायी जाती है, और फिर होली गीत गाये जाते हैं सभी लोग पहले मंदिर में देवी देवता को अबीर गुलाल चढ़ाते हैं और बाद में एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाते हैं, हर घर से गुड की एक एक दो-दो भेली भी मंदिर में आती है जिसको अंत में प्रसाद बना कर सब को बांटा जाता है।
holi prasaad-gud फिर मंदिर के बाद रास्ते में पढ़ने वाले एक घर से शुरू किया जाता है होली गायन। हमारे पहाड़ मे होली का एक अलग ही अंदाज है।

जहां पूरे देश मे मुख्य रूप से 2 दिन की ही होली होती है वहीं हमारे पहाड़ मे वो भी कुमाऊं मण्डल मे खासतौर से एक अलग ही तरह से होली का आयोजन किया जाता है।

पहले दिन यानि एकादशी के दिन गाँव के कुल देवी-देवता के मंदिर मे सभी होल्यार यानि सभी लोग जो होली गाते हैं, जाते हैं फिर मंदिर में होली गायी जाती है। उसके बाद पूरे गाँव मे एक एक करके सभी घरों मे जा कर होली मनाई जाती है। ये सिलसिला  होलिका दहन वाले दिन तक चलता है , प्रत्येक घर मे 2 होली गायी जाती है। जिस घर पे शाम हो जाती है उसके अगले वाले घर पे अगले दिन से शुरू की जाती है। दिन में 12-1 बजे से होल्यार 'होईखाव' (यानि जहां पे होलीका दहन किया जाता है वो स्थान) से प्रस्थान करते हैं। वो सभी लोग ढोल नगाड़ो के साथ उस घर पे पहुँचते हैं जहां पर से अगले दिन की होली गानी होती है। एक दिन मे कम से कम 12 से 18 घरो मे होली गायी जाती है।

जब किसी घर में होल्यार पहुँचते हैं तो उन पर अबीर गुलाल लगाया जाता है और पानी वाला रंग छिड़का जाता है सभी के कपड़ों में। फिर सौंप-सुपारी बांटी जाती है, सौंप सुपारी वाले बर्तन के साथ में बीड़ी सिगरेट भी रखी जाती है बड़ो के लिए जो ये पीते हैं। कुछ घरो पे चाय और आलू (यानि आलु गुटुक) की व्यवस्था होती है। और गुड़ की भेली फोड़ी जाती है जो  घर के सदस्यो के द्वारा दी जाती है। हर घर पे गुड़ की भेली दी जाती है लेकिन हर तीसरे या चौथे घर पे ही वो फोड़ी जाती हैं जिन घरो पे वो फोड़ी नहीं जाती उन्हे बताया जाता है कि वो उन भेलियों को होलिका दहन वाले दिन होली मैदान मे लायंगे जहां वो प्र्शाद के रूप मे अंतिम दिन बाटा जाएगा।

हर घर पे अपनी अपनी हैसियत के अनुसार होली की भेंट दी जाती है, जो गाँव के एक सदस्य के पास जमा होती हैं। उस राशी का होली के अंतिम दिन खुलासा किया जाता है। उस धन राशि से होलिका दहन के अगले दिन गाँव के मंदिर मे भंडारा किया जाता है और जो धनराशि बच जाती है उस से गाँव की प्ंचायत कुछ सामान खरीदने या गाँव मे कुछ बनाने का प्लान करती है।

     वंही दूसरी ओर महिलाए अपने पड़ोस मे चाँचरी का आयोजन करती हैं अलग अलग घरो पे अलग अलग दिन चाँचरी के साथ खूब सारी हंसी मज़ाक भी करते हैं वो लोग। वो भी एक दूसरे को अबीर गुलाल लगती हैं और सौप सुपारी बांटते हैं और चाय पनि की भी ब्यवस्था करते हैं। ये सब बहुत ही अच्छा लगता है दोस्तो।

आप लोग भी जो लोग अपनी पहाड़ की होली को नहीं देख पाये हैं अभी तक उन लोगो से गुजारिश है कि वो कभी होली के समय पर अपने लिए कुछ समय निकाले और आनंद उठाए पहाड़ की होली का।

इस ब्लॉग में मैंने (गोपाल बिष्ट यानि गोपू) ने अपने गाँव और आसपास की होली का जिकर किया है।
होता तो यही है हमारे पूरे पहाड़ मे लेकिन हो सकता है अलग अलग स्थानो मे अलग अलग तरीका  हो मनाने का।
दोस्तो अपने अगले ब्लॉग मे मैं आप लोगो के लिए कुछ पहाड़ी होली प्रस्तुत करूंगा।
ये मेरी एक कोशिश है अपनी परम्पराओ को जीवित रखना उन सबके दिलो मे जो आज इस भाग दौड़ भरी जिंदगी मे समय नहीं निकाल पाते हैं इन चीजों के लिए लेकिन वो बहुत चाहते हो इन्हे।

शब्दों में भूल-चूक माफ करना दोस्तो और दोस्तो अपनी प्यारी जन्मभूमि हमरो पहाड़ – उत्तरांचल का Facebook पेज Like करना न भूले ।

होली की खुबसूरत गाँव की विडियो के साथ साथ अन्य पहाड़ी विडियो भी देखें:

ठेठ पहाड़ी यूट्यूब विडियो चैनल: http://goo.gl/tjuOvU
यहाँ पर आपको पहाड़ की ओरिजनल विडियो देखने को मिलेंगी। आप देखना जरूर और हो सके तो शेयर भी कर दें।
धन्यवाद ! आप सब को होली की ढेर सारी शुभकामनायें !

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