Monday, March 3, 2014

पाठी, दवात और लकड़ी की कलम

दोस्तों आज से लगभग 30 साल पहले [कहीं कहीं तो अभी भी] हमारे पहाड़ के गाँवों में प्राइमेरी स्तर तक पढ़ने-लिखने के लिये उतने खास साधन नहीं हुआ करते थे लोग दूर दूर तक मिलों पैदल चल कर स्कूल जाया करते थे।
paathi-dawat-lakdi ki kalam

पाठी में लिखता हुवा बच्चा 
पढ़ने लिखने के लिये प्राइमेरी स्तर तक के बच्चे कापी किताब की जगह तख्ते की बनी हुई एक आयतकर तख्ती का इस्तेमाल करते थे, जिसे काले रंग से पोत दिया जाता था।

काले रंग के लिये टॉर्च के सेल का प्रयोग या कोयले का प्रयोग करते थे। इस तख्ती को गाँव में "पाठी" कहते थे। इसमें दोनों ओर से एक धागा बंधा होता था जो कंधे में या पीठ में लटकाने के लिये बना होता था।

इस पाठी में लिखने के लिये जिस स्याही का प्रयोग होता था उसे खड़िया (सफ़ेद पत्थर या मिट्टी) से बनाया जाता था। इसे एक छोटे से प्लास्टिक या टीन के बर्तन जिन्हें दवात कहा जाता था, में पानी ढाल कर भीगा दिया जाता था।

इस दवात पर भी एक धागा बांध दिया जाता था हाथ में पकड़ने के लिये।
 
पाठी में लिखने के लिये एक लकड़ी की कलम बनाई जाती थी, जिसे दवात में डुबो डुबो कर लिखा जाता था। उसे दवात में ही रखा जाता था। ऐसे थे वो दिन वो वक़्त जो आज कितना बदल चुका है।

पहले तो हर घर में ये मिल जाते थे पर अब बहुत से पुराने घरों में ही आज भी रखे हुये हैं ये 'पाठी-दवात' एक याद के रूप में।

मेरे कई मित्रों द्वारा मुझे ये बताया गया है  कि आज भी कुछ जगहों पर प्राइमेरी में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को पढ़ाने-लिखाने के लिये इस्तेमाल हो रही हैं। हमने भी प्राइमेरी में पहली कक्षा तक इसी में पढ़ा था।

दोस्तों इस पोस्ट को लिखने का मेरा यही एक मात्र उद्देस्य है कि वो दिन और वो हमारी सांस्कृति विरासतें तो हमारे जेहन में अभी भी मौजूद हैं पर इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में वो थोड़ा थोड़ा कर के पीछे छूटते जा रहे हैं।
ये बहुत जरूरी है कि हमें इस समय के साथ कदम से कदम मिलना है, आगे बढ़ना है पर इसके लिये हम अपने वो सुनहरे पल भूल तो नहीं सकते ना। कल को आने वाली हमारी अगली पीड़ी को कम से कम ये तो पता होना चाहिये कि एक वो समय था जब ऐसा होता था। इसलिये मेरे मन में ये ख्याल आया क्यूँ ना थोड़ा सा वक़्त उन यादों को सँजोने में लगाऊँ।

मुझे पूरी आशा है कि आप लोगों को यह पोस्ट जरूर अच्छा लगेगा, ये जरूर आपके दिलों को छुवे का क्यूंकी कहीं न कहीं आपका भी इससे लगाव है।

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दोस्तों नीचे Comment बॉक्स में अपनी राय देना ना भूलें।  धन्यवाद 

2 comments:

  1. बहुत उपयुक्त लेख लिखा है आपने! बहुत बहुत धन्यवाद.

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